Hain Mere Prayas Haare Par Nahi Aasha Hai Haari
" है मुझे घेरी निराशा फिर भी लड़ते जा रहा हूँ ,
हौसला अब भी है जिंदा जानता हूँ है जीत आगे ,हैं मेरे प्रयास हारे पर नहीं आशा है हारी ,
जीत मेरी है सुनिश्चित बस दो कदम चलना है आगे....
मुझको नही इतना है संशय की जीत तो मेरी है होनी ,
पर सहज मिल जाये ऐसी जीत में फिर स्वाद क्या है ,
लड़ता तो वोह सूर्य भी है रात्रि के गहरे तिमिर से ,
और लहरें भी निरंतर सागरों से युद्ध करती ,
पर यदि थक जाये ये तो क्या हमे मिलता सवेरा ,
पर वहीँ ये सत्य भी है कि बिन तिमिर क्या है सवेरा .....
जय पराजय और सुख दुःख है अधूरे बिन एक दूजे ,
हो न दुःख जो ज़िन्दगी में तो कौन परमेश्वर को पूजे ...
तो लड़ निरंतर विफलताओं से अपनी जीत है प्रत्यक्ष तेरे ,
दुःख की ये रातें छनिक है और सुख के हैं लम्बे सवेरे ,
उठ खड़ा हो तू धैर्य मत खो छट रहे हैं ये अँधेरे ,
आगे बस स्वर्णिम सुबह है होंगे सफल प्रयास तेरे ,
हार मत लड़ता ही जा वोह देख छट रहे हैं अँधेरे ,
जीत तेरी है सुनिश्चित बस दो कदम चलना है आगे ..... "
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