Friday, August 9, 2013

हैं मेरे प्रयास हारे पर नहीं आशा है हारी....



             

        Hain Mere Prayas Haare Par Nahi Aasha Hai Haari

 
         



" है मुझे घेरी  निराशा  फिर  भी  लड़ते  जा  रहा  हूँ ,
हौसला अब भी  है  जिंदा  जानता  हूँ  है  जीत  आगे ,
हैं  मेरे  प्रयास  हारे  पर  नहीं  आशा  है  हारी ,
जीत  मेरी  है  सुनिश्चित  बस  दो  कदम  चलना  है  आगे....
मुझको  नही  इतना  है  संशय  की  जीत  तो  मेरी  है  होनी ,
पर  सहज  मिल  जाये  ऐसी  जीत  में  फिर  स्वाद  क्या  है ,
लड़ता  तो  वोह  सूर्य  भी  है  रात्रि  के  गहरे  तिमिर  से ,
और  लहरें  भी  निरंतर  सागरों  से  युद्ध  करती ,
पर  यदि  थक  जाये  ये  तो  क्या  हमे  मिलता  सवेरा ,
पर  वहीँ  ये  सत्य  भी  है  कि बिन  तिमिर  क्या  है  सवेरा .....
जय  पराजय  और  सुख  दुःख  है  अधूरे  बिन  एक  दूजे ,
हो    दुःख  जो  ज़िन्दगी  में  तो  कौन  परमेश्वर  को  पूजे ...
तो  लड़  निरंतर  विफलताओं  से  अपनी  जीत  है  प्रत्यक्ष  तेरे ,
दुःख  की  ये  रातें  छनिक  है  और  सुख  के  हैं  लम्बे  सवेरे ,
उठ  खड़ा  हो  तू  धैर्य  मत  खो  छट  रहे  हैं  ये  अँधेरे ,
आगे  बस  स्वर्णिम  सुबह  है  होंगे  सफल  प्रयास  तेरे ,
हार  मत  लड़ता  ही  जा  वोह  देख  छट रहे हैं  अँधेरे ,
जीत  तेरी  है  सुनिश्चित  बस  दो  कदम  चलना  है  आगे ..... "



 
 
 

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