Saturday, September 28, 2013

माँ तेरी गोद में

 
 
 
 
बड़ी सुखद अनुभूति है माँ  तेरी गोद की ,
अद्भुत  स्वर्णिम प्रीति है माँ  तेरी गोद में,
कोई स्वार्थ नही बस ममता के बादल जहाँ उमड़ते हैं,
ममत्व की बस बारिश है,इस सुन्दर सहज परिवेश में...
 
तेरे स्पर्श मात्र से ही सब कष्ट मिट जाते हैं,
ह्रदय आह्लादित हो उठता है,अधर सहज मुस्काते हैं,
कितनी शीतल कितनी निर्मल तेरे आँचल की छाया है,
शायद ये कोई पुण्य है मेरा,जो मैंने तुमको पाया है...
 
हे मात तुझे है कोटि नमन,हैं धन्य हुआ जीवन मेरा,
सच है मैं कितना भाग्यवान,जो तेरी मुझपे छाया है,
हे ईश मुझे इस योग्य बना,खुशियाँ इस आँचल में भर पाउं,
इन आँखों में बस खुशियाँ देखूं,इन चरणों में ही मर जाउं....
 
 

                                                   शैलेन्द्र हर्ष गुप्ता
                                                (२८ सितम्बर २०१३ )

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